विस्तृत उत्तर
लोक-व्यवहार में भूत और प्रेत का प्रयोग समानार्थी शब्दों के रूप में होता है, पर धर्मशास्त्रों में दोनों में सूक्ष्म अंतर है। प्रेत एक संक्रमणकालीन अवस्था है, जो मुख्य रूप से मृत्यु-संस्कारों, अंत्येष्टि और पिण्डदान के अभाव के कारण उत्पन्न होती है। प्रेत अपनी यातना से मुक्ति चाहता है और परिजनों को स्वप्न आदि के माध्यम से श्राद्ध करने का संकेत देता है। भूत एक आसक्ति-जनित अवस्था है। भूत प्रायः अपनी इच्छा से पृथ्वी पर रुके रहते हैं क्योंकि वे अपनी संपत्ति, घर या प्रियजनों को छोड़ना नहीं चाहते, या उन्हें अपने हत्यारे से बदला लेना होता है। भूत प्रायः उसी स्थान पर रहते हैं जहाँ उनकी मृत्यु हुई थी या जहाँ उनका सर्वाधिक मोह था।
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