📖
विस्तृत उत्तर
पिण्डदान न होने पर आत्मा इसलिए आकाश में भटकती है क्योंकि प्रथम दस दिनों के पिण्डदान से ही उसके पिण्डज शरीर का निर्माण होता है। यदि यह विधिपूर्वक न किया जाए, तो प्रेत को तृप्ति नहीं मिलती और उसके लिए आवश्यक पारलौकिक देह नहीं बनती। तब वह भूख से व्याकुल होकर बिना अन्न-जल के अनंत काल तक आकाश में वायव्य रूप में भटकती रहती है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?


