विस्तृत उत्तर
भगवान की मूर्ति के सामने भोजन करने के विषय में विभिन्न परंपराओं में भिन्न मत हैं।
सामान्यतः वर्जित माना जाता है
- 1पूजा स्थल में भोजन — पूजा घर में बैठकर भोजन करना अधिकांश परंपराओं में उचित नहीं माना जाता। पूजा स्थल केवल पूजा, ध्यान और भक्ति के लिए है।
- 2अशुद्धि — भोजन के दौरान जूठन, टुकड़े गिरना आदि से पूजा स्थल अपवित्र होता है।
- 3अनादर — भगवान की उपस्थिति में सामान्य भोजन करना अनादर माना जा सकता है।
अपवाद और भिन्न दृष्टिकोण
- 1प्रसाद ग्रहण — भगवान को अर्पित किया गया भोग प्रसाद के रूप में पूजा स्थल के समीप ग्रहण करना पूर्णतः शुभ है। यह अलग बात है।
- 2मंदिर में भोग — बड़े मंदिरों (जगन्नाथ पुरी, तिरुपति) में भगवान के समक्ष प्रसाद ग्रहण करना पुण्यदायक माना जाता है।
- 3यदि घर छोटा है — यदि पूजा स्थल अलग कमरे में नहीं बल्कि रसोई या हॉल में है, तो पर्दा बंद करके भोजन करें।
- 4भाव प्रधान दृष्टिकोण — कुछ भक्ति परंपराओं में भगवान को परिवार का सदस्य मानकर उनके साथ भोजन करना भक्ति का रूप माना जाता है। परंतु यह सामान्य नियम नहीं है।
व्यावहारिक सुझाव
- ▸पूजा स्थल में बैठकर सामान्य भोजन न करें।
- ▸यदि मूर्ति सामने दिखती है तो पर्दा बंद करें।
- ▸प्रसाद ग्रहण करना सर्वथा उचित है।
- ▸भोजन से पहले भगवान को भोग अवश्य लगाएं।





