विस्तृत उत्तर
कुंभ = समुद्र मंथन से अमृत कलश — 4 स्थान पर अमृत बूंदें गिरीं।
4 स्थान + चक्र
- ▸प्रयागराज — हर 12 वर्ष (महाकुंभ 144 वर्ष)
- ▸हरिद्वार — हर 12 वर्ष
- ▸उज्जैन (सिंहस्थ) — हर 12 वर्ष
- ▸नासिक — हर 12 वर्ष
- ▸अर्धकुंभ — हर 6 वर्ष (प्रयागराज/हरिद्वार)
स्नान महत्व: कुंभ स्नान = करोड़ों पाप नाश; अमृत तुल्य। शाही स्नान (विशेष तिथि) = सर्वोत्तम। नागा साधु/अखाड़े सबसे पहले।
ज्योतिष: बृहस्पति+सूर्य विशिष्ट राशि = कुंभ योग।



