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प्रयागराज से जुड़े सभी प्रश्न(10)

प्रयागराज पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 10 प्रश्न उपलब्ध हैं।

धर्म मार्गदर्शन

तीर्थ यात्रा से पापों का नाश कैसे होता है?

तीर्थ यात्रा = तप + पवित्र जल + संत संग + मन शुद्धि। प्रमुख: प्रयागराज (संगम), काशी, गया (पितृ तर्पण), रामेश्वरम, चार धाम। शर्त: श्रद्धा + पश्चाताप + सदाचार। बिना भक्ति भाव तीर्थ व्यर्थ (कबीर)।

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तीर्थ

प्रयागराज संगम स्नान का विशेष महत्व?

प्रयागराज=तीर्थराज। त्रिवेणी(गंगा+यमुना+सरस्वती), ब्रह्मा प्रथम यज्ञ, अक्षयवट। संगम स्नान=करोड़ पुण्य। माघ/कुंभ=विशेष। पिंडदान=गया समान।

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प्रमुख मंदिर

माँ चंद्रघंटा का प्रमुख मंदिर कहाँ है?

माँ चंद्रघंटा का प्रमुख मंदिर: प्रयागराज (इलाहाबाद), उत्तर प्रदेश = क्षेमेश्वरी देवी मंदिर या क्षेमा माई का मंदिर। तीसरे नवरात्रि पर बड़ी संख्या में भक्त। मान्यता: पार्वती ने यहाँ चंद्रघंटा रूप में तपस्या की थी।

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स्नान विधि

मकर संक्रांति पर तीर्थ स्नान का क्या महत्व है?

मकर संक्रांति पर गंगा, यमुना या प्रयागराज जैसे पवित्र संगम पर तीर्थ स्नान = 'ब्रह्मलोक' की प्राप्ति।

#तीर्थ स्नान#प्रयागराज#गंगा यमुना
सरस्वती नदी का ऐतिहासिक सत्य

त्रिवेणी संगम में सरस्वती का क्या महत्व है?

त्रिवेणी संगम (प्रयागराज) में सरस्वती को गंगा-यमुना के साथ अंतःसलिला (भूमिगत) नदी के रूप में पूजा जाता है। 17वीं सदी के यूरोपीय यात्री पीटर मुंडी ने भी अपने यात्रा-वृत्तांत में इसका उल्लेख किया था।

#त्रिवेणी संगम#प्रयागराज#अंतःसलिला
तीर्थ एवं धाम

प्रयागराज संगम पर स्नान कब करें?

प्रयागराज संगम में कभी भी स्नान किया जा सकता है, लेकिन माघ मास विशेष है। सबसे महत्वपूर्ण स्नान तिथियाँ हैं — मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि। हर 12 वर्ष में कुंभ और 144 वर्षों में महाकुंभ का विशेष महत्व है।

#प्रयागराज#संगम स्नान#माघ मेला
तीर्थ एवं धाम

प्रयागराज का माहात्म्य क्या है?

प्रयागराज 'तीर्थराज' है — यहाँ ब्रह्माजी ने प्रथम यज्ञ किया, गंगा-यमुना-सरस्वती का त्रिवेणी संगम है, और समुद्र मंथन के अमृत की बूंदें गिरने से कुंभ मेला लगता है। माघ में यहाँ स्नान दस हजार तीर्थों के समान फलदायी है।

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तीर्थ यात्रा

प्रयागराज त्रिवेणी संगम स्नान का पुण्य

तीर्थराज; गंगा+यमुना+सरस्वती संगम। स्नान = 1000 अश्वमेध तुल्य। अस्थि विसर्जन/पिंडदान सर्वोत्तम। संकल्प→3 डुबकी→तर्पण→दान। नाव से संगम बिंदु। माघ मेला/कुंभ विशेष।

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श्राद्ध एवं पितृ कर्म

प्रयागराज में अस्थि विसर्जन का विशेष महत्व

प्रयागराज = तीर्थराज (सबसे श्रेष्ठ)। त्रिवेणी संगम (गंगा+यमुना+सरस्वती) = त्रिदेव आशीर्वाद। अक्षयवट पिंडदान अत्यंत पुण्यदायक। पद्म पुराण: 'प्रयाग सब तीर्थों से विशिष्ट।' कुंभ में गुणित फल।

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तीर्थ स्नान

प्रयागराज संगम स्नान का क्या विशेष महत्व है

प्रयागराज त्रिवेणी संगम (गंगा-यमुना-सरस्वती) तीर्थराज है। ब्रह्मपुराण: संगम स्नान = अश्वमेध यज्ञ फल। मत्स्यपुराण: माघ में स्नान = 10,000 तीर्थ यात्रा। पद्मपुराण: मोक्ष प्रदायक। तीन डुबकी — पापनाश, पितृ शान्ति, परिवार कल्याण। कुंभ/महाकुंभ में स्नान सर्वोत्तम।

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