विस्तृत उत्तर
त्रिवेणी संगम (प्रयागराज) में आज भी सरस्वती को यमुना और गंगा के साथ एक अंतःसलिला (भूमिगत) नदी के रूप में पूजा जाता है, जिसका उल्लेख १७वीं शताब्दी में भारत आए यूरोपीय यात्री पीटर मुंडी ने भी अपने यात्रा-वृत्तांत में किया था।
त्रिवेणी संगम (प्रयागराज) में सरस्वती को गंगा-यमुना के साथ अंतःसलिला (भूमिगत) नदी के रूप में पूजा जाता है। 17वीं सदी के यूरोपीय यात्री पीटर मुंडी ने भी अपने यात्रा-वृत्तांत में इसका उल्लेख किया था।
त्रिवेणी संगम (प्रयागराज) में आज भी सरस्वती को यमुना और गंगा के साथ एक अंतःसलिला (भूमिगत) नदी के रूप में पूजा जाता है, जिसका उल्लेख १७वीं शताब्दी में भारत आए यूरोपीय यात्री पीटर मुंडी ने भी अपने यात्रा-वृत्तांत में किया था।
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