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अन्त्येष्टि संस्कार📜 गरुड़ पुराण, मनुस्मृति, धर्मसिंधु, गृह्यसूत्र2 मिनट पठन

दाह संस्कार में मुखाग्नि कौन देता है नियम क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

मुखाग्नि: ज्येष्ठ पुत्र (सर्वप्रथम) → अन्य पुत्र → पौत्र → भाई → भतीजा → शिष्य/मित्र। स्त्री: परम्परागत=विधान नहीं, आधुनिक=पुत्री/पत्नी (क्षेत्रीय)। विधि: परिक्रमा→कंधे घड़ा→मुख अग्नि→'ॐ'।

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विस्तृत उत्तर

मुखाग्नि = मृतक के मुख पर अग्नि देना = दाह संस्कार का सबसे महत्वपूर्ण कर्म:

कौन देता है (प्राथमिकता क्रम)

  1. 1ज्येष्ठ (बड़ा) पुत्र: सर्वप्रथम अधिकार। शास्त्रों में 'ज्येष्ठ पुत्र' को मुखाग्नि का सर्वोच्च अधिकारी माना गया है। 'पुत्र' शब्द = 'पुत् (नरक) + त्र (त्राण/रक्षा)' = जो पुत् (नरक) से रक्षा करे।
  1. 1अन्य पुत्र: ज्येष्ठ न हो/अनुपस्थित = अन्य पुत्र।
  1. 1पौत्र (पोता): पुत्र न हो = पौत्र।
  1. 1भाई: पुत्र-पौत्र न हो = सगा भाई।
  1. 1भतीजा/अन्य पुरुष सम्बंधी: उपरोक्त न हो = भतीजा, चचेरा भाई, अन्य निकट पुरुष सम्बंधी।
  1. 1शिष्य/मित्र: कोई पुरुष सम्बंधी न हो = शिष्य, घनिष्ठ मित्र।
  1. 1स्त्री/पत्नी: परम्परागत शास्त्रों में स्त्री द्वारा मुखाग्नि का स्पष्ट विधान नहीं। किन्तु कुछ आधुनिक विद्वान और सामाजिक परिवर्तन के अनुसार पुत्री/पत्नी भी मुखाग्नि दे सकती हैं — यह क्षेत्रीय परम्परा और परिवार निर्णय पर निर्भर।

विधि: मस्तक (मुख) की ओर से अग्नि = 'मुखाग्नि'। चिता = दक्षिण दिशा में सिर। अग्निदाता तीन बार चिता की परिक्रमा → कंधे पर घड़ा (जल भरा, छेद सहित) → मुख पर अग्नि → 'ॐ' उच्चारण।

विशेष: संन्यासी/साधु = भूमि समाधि (दाह नहीं)। छोटे बच्चे (5 वर्ष से कम) = भूमि समाधि।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, मनुस्मृति, धर्मसिंधु, गृह्यसूत्र
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