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अन्त्येष्टि संस्कार📜 गरुड़ पुराण, धर्मसिंधु, मत्स्य पुराण2 मिनट पठन

तेरहवीं के दिन किन किन कर्मों का विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

तेरहवीं: अशौच समाप्ति स्नान → श्राद्ध/तर्पण/पिण्डदान → शांति हवन → ब्राह्मण भोज + दक्षिणा → दान (शय्या, वस्त्र, छाता, गोदान) → कौवा-गाय-कुत्ता ग्रास → परिवार भोज → पगड़ी रस्म। मांगलिक 1 वर्ष वर्जित।

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विस्तृत उत्तर

तेरहवीं (त्रयोदशाह श्राद्ध) = मृत्यु के 13वें दिन = अशौच (सूतक) समाप्ति और मृतक आत्मा की शांति हेतु कर्म:

विधान

  1. 1अशौच समाप्ति स्नान: परिवार के सभी सदस्य स्नान → शुद्ध वस्त्र → अशौच (सूतक) समाप्त।
  1. 1श्राद्ध/तर्पण: मृतक के नाम-गोत्र से तर्पण। पिण्डदान। 'ॐ (नाम) गोत्राय प्रेताय तिलोदकं ददामि।'
  1. 1हवन: शांति हवन — मृतक आत्मा की शांति और परिवार की शुद्धि।
  1. 1ब्राह्मण भोज: ब्राह्मणों को भोजन कराना अनिवार्य। 1, 3, 5, 7, 11 या अधिक ब्राह्मण। भोजन = सात्त्विक (प्याज-लहसुन रहित)। दक्षिणा दें।
  1. 1दान: वस्त्र, बिस्तर, छाता, जूते, बर्तन, अन्न — मृतक के उपयोग की वस्तुएँ ब्राह्मण/जरूरतमंद को दान। 'शय्या दान' (बिस्तर+चादर) विशेष पुण्यदायी।
  1. 1गाय दान: यथाशक्ति गोदान = सर्वश्रेष्ठ दान। मान्यता: गाय मृतक को वैतरणी नदी पार कराती है।
  1. 1कौवे को ग्रास: भोजन का एक अंश कौवे, गाय, कुत्ते को दें।
  1. 1परिवार भोज: ब्राह्मण भोज के बाद परिवार और सम्बंधी भोजन करें।
  1. 1पगड़ी रस्म (कुछ परम्पराओं में): उत्तराधिकारी (ज्येष्ठ पुत्र) को पगड़ी/पाग बंधाई = घर का नया मुखिया।

विशेष: तेरहवीं के बाद = सामान्य जीवन आरम्भ। मांगलिक कार्य (विवाह आदि) एक वर्ष तक वर्जित (कुछ परम्पराओं में 6 माह)।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, धर्मसिंधु, मत्स्य पुराण
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