विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत (5.24.7) के अनुसार इन सातों निचले लोकों की लंबाई और चौड़ाई ठीक पृथ्वी के ही समान है। इसका अर्थ है कि अतल लोक की लंबाई-चौड़ाई उतनी ही विशाल है जितनी पृथ्वी की। विष्णु पुराण के द्वितीय अंश, पंचम अध्याय में महर्षि पराशर ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक पाताल का विस्तार दस-दस हजार योजन है। इस प्रकार अतल लोक एक अत्यंत विशाल भूमिगत संसार है जो पृथ्वी के समान ही फैला हुआ है। यहाँ दैत्यों, दानवों और नागों के विशाल नगर बसे हुए हैं जिनका वर्णन वायु पुराण में मिलता है।
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