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विस्तृत उत्तर
दान सदैव 'सुपात्र' (संयमी ब्राह्मण, असहाय, नेत्रहीन, या दरिद्र) को ही देना चाहिए।
महिलाएँ विशेष रूप से सुहाग-सामग्री, मिट्टी या पीतल के पात्र, कुमकुम, हल्दी और अन्नादि का दान कर सकती हैं।
भविष्य पुराण' स्पष्ट करता है कि वेदज्ञ ब्राह्मणों से लेकर शूद्रों तक सभी को संक्रांति के अवसर पर अपनी क्षमता अनुसार मन्त्र-सहित या मन्त्र-रहित स्नान-दान करने का पूर्ण अधिकार है।
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