विस्तृत उत्तर
गौरी–शंकर साधना शिवपुराण, स्कंदपुराण, देवीभागवत, कौमार तांत्र और आगमिक ग्रंथों में वर्णित शिव और पार्वती की संयुक्त उपासना है।
इस साधना का मूल उद्देश्य साधक के जीवन में शीघ्र विवाह, शुभ संयोग, दांपत्य-सौभाग्य की स्थापना और कुंडलीगत ग्रहों के क्लेश की शांति करना है।
इस उपासना की प्रभावकारिता मात्र दो देवताओं के आह्वान में नहीं, बल्कि शिव (चेतना) और पार्वती (शक्ति) के शाश्वत, अविनाभावी संबंध के साथ स्वयं को संरेखित करने में निहित है।





