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विस्तृत उत्तर
पुरुष साधक भी गौरी-शंकर स्वरूप की उपासना करके पार्वती-शिव के समान अटूट, स्थिर और मंगलमय वैवाहिक संबंध की कामना करते हैं।
यह आंतरिक संतुलन ही दांपत्य सुख का मूल कारण है, क्योंकि यह साधक को आत्म-पूर्णता की ओर ले जाता है, जो एक स्थायी और सामंजस्यपूर्ण बाहरी संबंध के लिए अनिवार्य शर्त है।
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