विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त स्वरूप समस्त सृष्टि का मूल आधार है। यह सनातन दर्शन इस बात की पुष्टि करता है कि संपूर्ण विशाल विश्व की सृष्टि इन्हीं दोनों के आधार पर टिकी हुई है।
गौरी-शंकर स्वरूप की उपासना दांपत्य जीवन को सुखी बनाती है और मनोवांछित सौभाग्य प्रदान करती है।
गौरी-शंकर का पूजन केवल पति-पत्नी के बाह्य योग का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह साधक के आंतरिक शिव (पुरुष) और शक्ति (प्रकृति) के मिलन को दर्शाता है।





