विस्तृत उत्तर
इस व्रत में गौरी-शंकर की संयुक्त पूजा होती है। व्रती महिलाएं अष्ट प्रहर पूजा करती हैं। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि) अर्पित की जाती है।
स्कंद पुराण के अनुसार, अपामार्ग, धतूरा, बेलपत्र, चम्पक और शमी पत्रों से माता पार्वती के विभिन्न नामों (दुर्गा, कात्यायनी, भवानी, रुद्राणी आदि) का उच्चारण करते हुए पूजा की जाती है।
भगवान शिव का कथन है कि जो स्त्री पूर्ण श्रद्धा से इस व्रत को करेगी, उसे माता पार्वती के समान अचल सुहाग और मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।





