📖
विस्तृत उत्तर
यक्ष योनि पूर्व जन्म के मिश्रित कर्मों से प्राप्त होती है। यक्ष पूर्णतः पापी नहीं होते। वे मनुष्य जो समाज में यज्ञ, दान, तप और परोपकार तो करते हैं, परंतु जिनके भीतर अहंकार, विलासिता और भौतिक सुखों की तीव्र इच्छा बनी रहती है, वे स्वर्ग के स्थान पर यक्ष योनि प्राप्त करते हैं। इस योनि में सत्त्वगुण अल्प मात्रा में, रजोगुण अत्यधिक मात्रा में और तमोगुण भी उपस्थित रहता है। इसलिए यक्ष योनि धर्म और भौतिक आसक्ति के मिश्रित परिणाम का प्रतीक है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





