विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत महापुराण को महामुनि व्यासदेव द्वारा निर्मित ग्रंथ बताया गया है। इसमें मोक्ष तक के फल की कामना से रहित परम धर्म का निरूपण है। यह शुद्ध अंतःकरण वाले सत्पुरुषों के जानने योग्य वास्तविक वस्तु, यानी परमात्मा, का वर्णन करता है। पाठ के अनुसार वही परमात्मा जगत की सृष्टि, स्थिति और लय का आधार है, स्वयंप्रकाश है और माया तथा माया के कार्य से पूर्णतः मुक्त है। इसी ग्रंथ को वेद रूप कल्पवृक्ष का पका हुआ फल भी कहा गया है, जो शुकदेवजी के मुख से अमृतरस से परिपूर्ण हुआ। इसलिए श्रीमद्भागवत भगवान, परम सत्य, परम धर्म और भगवत रस का महापुराण है।
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