विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत महापुराण में भस्मासुर यानी वृकासुर के प्रसंग में भगवान विष्णु मोहिनी नहीं, बल्कि तेजस्वी ब्रह्मचारी रूप में आते हैं। वे मृगचर्म, मेखला, दंड और ब्रह्मचारी के तेज से युक्त दिखाई देते हैं। वे भस्मासुर को रोककर प्रेम से बात करते हैं, उसकी थकान पूछते हैं और धीरे-धीरे उसके मन में शिव के वरदान पर संदेह पैदा करते हैं। फिर वे उसे अपने ही सिर पर हाथ रखकर वरदान की परीक्षा करने को कहते हैं। वृकासुर उनकी योगमाया से भ्रमित होकर ऐसा करता है और तुरंत भस्म हो जाता है।
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