विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना के संबंध में स्पष्ट कहा गया है कि यह महामुनि व्यासदेव द्वारा निर्मित है। इसके साथ यह भी बताया गया है कि इस ग्रंथ में मोक्ष तक की फल-कामना से रहित परम धर्म का निरूपण हुआ है। यह केवल कथा-संग्रह के रूप में नहीं रखा गया, बल्कि शुद्ध अंतःकरण वाले सत्पुरुषों के जानने योग्य वास्तविक तत्त्व, परमात्मा, को प्रकट करने वाला ग्रंथ कहा गया है। वही परमात्मा तीन तापों का मूल से नाश करने वाला और परम कल्याण देने वाला है। इसलिए श्रीमद्भागवत की रचना महामुनि व्यासदेव ने ऐसे ग्रंथ के रूप में की, जो मनुष्य को परम धर्म, परमात्मा और कल्याण की ओर ले जाता है।
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