विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत नवम स्कंध में राजा अम्बरीष की कथा भक्ति के सर्वोच्च आदर्श के रूप में आती है। इसमें नाभाग की वंश-परंपरा, अम्बरीष का वैष्णव चरित्र, उनकी नवधा भक्ति, एकादशी व्रत और दुर्वासा-सुदर्शन प्रसंग वर्णित है। अम्बरीष केवल राजधर्म में नहीं, बल्कि आत्मनिवेदन में भी श्रेष्ठ थे। दुर्वासा ने उनका अनिष्ट चाहा, पर सुदर्शन चक्र ने उनकी रक्षा की। वैकुण्ठ में भगवान विष्णु ने अहं भक्तपराधीनो कहकर बताया कि वे अपने भक्तों के प्रेम से बंधे हैं। यह नवम स्कंध का अत्यंत महत्वपूर्ण भक्तिपरक प्रसंग है।
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