विस्तृत उत्तर
बताया गया है कि भगवान वेदव्यास ने भागवत नाम का पुराण बनाया। यह वेद के समान है और भगवत चरित्र से परिपूर्ण है। उन्होंने इस प्रशंसनीय, कल्याणकारी और महान पुराण को लोकों के परम कल्याण के लिए रचा। फिर इसे अपने आत्मज्ञानी शिरोमणि पुत्र शुकदेवजी को ग्रहण कराया। इसलिए श्रीमद्भागवत किसी सीमित समूह, वाद-विवाद या बाहरी प्रतिष्ठा के लिए नहीं बनाई गई, बल्कि लोकों के परम कल्याण के लिए बनाई गई है। इसमें भगवत चरित्र है, वेदों के समान महत्त्व है और इसे शुकदेव जैसे आत्मज्ञानी को सौंपा गया ताकि यह योग्य रूप से सुनाया जा सके।
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