विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार रसातल छठा अधोलोक है और इसके नीचे सातवाँ लोक पाताल है। रसातल में दिति के पुत्र दैत्य और दनु के पुत्र दानव रहते हैं। इनके प्रमुख समूह पणि, निवातकवच, कालेय और हिरण्यपुरवासी हैं। ये जन्म से ही देवताओं के शत्रु, अत्यंत बलवान और साहसी हैं। फिर भी भगवान श्री हरि के सुदर्शन चक्र के उग्र तेज से उनका बल और अहंकार कुचल दिया जाता है। इसी कारण वे सर्पों की तरह बिलों में छिपकर रहते हैं। श्रीमद्भागवत में यह भी कहा गया है कि सरमा के मंत्रमय वचनों से वे इंद्र से भयभीत रहते हैं।
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