विस्तृत उत्तर
शास्त्रों की दृष्टि से जपमाला एक साधारण गणना-यंत्र नहीं, अपितु एक अत्यंत शक्तिशाली एवं दिव्य आध्यात्मिक उपकरण है। यह साधक और साध्य के मध्य एक सेतु है, शक्ति-स्वरूपा है और ऊर्जा की संवाहक है।
यह समझना आवश्यक है कि माला केवल एक गणक नहीं, अपितु ऊर्जा का एक जीवंत संवाहक है। जब साधक मंत्रोच्चार के साथ एक-एक मनके को आगे बढ़ाता है, तो वह केवल गिनती नहीं कर रहा होता, अपितु प्रत्येक मनके को मंत्र की दिव्य ध्वनि-तरंगों से अभिमंत्रित एवं ऊर्जान्वित कर रहा होता है।
108 बार के मंत्रोच्चार से यह माला एक शक्तिशाली ऊर्जा-चक्र का निर्माण करती है, जो साधक के आभामंडल को सुदृढ़ करती है और उसे गहन ध्यानावस्था में ले जाने में सहायक होती है।





