विस्तृत उत्तर
जब किसी साधक की साधना और मंत्र पूर्ण रूप से सिद्ध होने की अवस्था में आते हैं, तो उसके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर कई स्पष्ट लक्षण प्रकट होते हैं।
वाक् सिद्धि — यह सबसे प्रमुख लक्षण है। साधक के मुख से सहज रूप से निकली हुई बात, चाहे वह आशीर्वाद हो या सामान्य कथन, सत्य होने लगती है। उसका संकल्प अत्यंत बलवान हो जाता है।
मानसिक स्थिति — मंत्र सिद्ध होने पर मन से काम, क्रोध, लोभ और अहंकार का प्रभाव लगभग समाप्त हो जाता है। साधक के भीतर एक गहरी शांति और निर्भयता का वास हो जाता है।
अलौकिक अनुभव — स्वप्न या ध्यान की अवस्था में अपने इष्ट देव के बार-बार दर्शन होना, दिव्य सुगंध का अनुभव होना और भविष्य की घटनाओं का पूर्वाभास (अंतर्ज्ञान) होना इसके प्रत्यक्ष प्रमाण माने गए हैं।





