विस्तृत उत्तर
शिवजी ने रति को सान्त्वना देते हुए वरदान दिया कि उनके पति कामदेव अब 'अनंग' (बिना शरीर के) नाम से जाने जायेंगे और बिना शरीर के ही सबको व्यापेंगे (सबके हृदय में काम-भावना रहेगी)।
दोहा — 'अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु। बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु॥'
इसका अर्थ — हे रति! अबसे तेरे स्वामीका नाम अनंग होगा। वह बिना ही शरीरके सबको व्यापेगा। अब तू अपने पतिसे मिलनेकी बात सुन।
शिवजी ने बताया कि जब भगवान विष्णु श्रीकृष्ण रूप में अवतार लेंगे, तब कामदेव उनके पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लेंगे और तब रति को अपना पति वापस मिलेगा।
इस प्रकार शिवजी ने कामदेव को भस्म करके भी रति पर कृपा की — यह उनके 'आशुतोष' (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) स्वभाव का प्रमाण है।





