विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में विश्राम के अभाव का स्पष्ट वर्णन है।
नरक में विश्राम नहीं — 'नरकों में दुःख-बहुलास्तत्र' — नरक में दुःख की अधिकता है। कोई विश्राम, कोई सुकून नहीं।
यमदूत निरंतर सक्रिय — 'यम के आज्ञाकारी प्रचण्ड और चण्डक आदि दूत एक पाश से उन्हें बाँधकर नरक में दंड देते रहते हैं।' यमदूत विश्राम नहीं देते।
बेहोशी से जागरण — 'यहाँ आत्मा की बार-बार पिटाई की जाती है। ऐसा तब तक चलती है जब तक दंड अवधि समाप्त नहीं होती।' बेहोश होने पर भी जागृत किया जाता है।
taamis नरक में — 'उसे कोई शांति नहीं मिलती, केवल तड़प ही उसका भाग्य होता है।'
पुण्यात्मा को राहत — इसके विपरीत, पुण्यात्मा को यममार्ग पर दान और पुण्य से राहत मिलती है। जिसने जीवन में दान किया, उसे यममार्ग पर पाथेय (यात्रा-भोजन) मिलता है।





