विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में शाल्मली नरक की यातनाओं का अत्यंत भावुक और भयावह वर्णन है।
उल्टा लटकाना और पीटना — 'उस वृक्ष में नीचे मुख करके उसे साँकलों से बाँधकर वे दूत पीटते हैं। वहाँ जलते हुए वे रोते हैं, पर वहाँ उनका कोई रक्षक नहीं होता।'
भूख-प्यास की पीड़ा — 'उसी शाल्मली वृक्ष में भूख और प्यास से पीड़ित तथा यमदूतों द्वारा पीटे जाते हुए अनेक पापी लटकते रहते हैं।'
वृक्ष के काँटे — शाल्मली वृक्ष के लंबे और तीखे काँटे उल्टे लटके पापी के शरीर में चुभते हैं।
आश्रय-विहीन — 'वे आश्रयविहीन पापी अंजलि बाँधकर — हे यमदूतों! — पुकारते हैं।' उनकी पुकार व्यर्थ जाती है।
शाल्मली के पात्र — परस्त्रीगामी, पति को दोष लगाने वाली स्त्री और अन्य पापी। 'जो स्त्री अपने पति को दोष लगाकर परपुरुष में आसक्त होने वाली है — ये शाल्मली वृक्ष द्वारा बहुत ताड़ना प्राप्त करते हैं।'





