विस्तृत उत्तर
हाँ। गरुड़ पुराण में यह सिद्धांत है कि पाप की तीव्रता के अनुसार दंड का स्तर निश्चित होता है।
साधारण पापी से अधिक — साधारण पापी को एक नरक मिल सकता है, परंतु महापापी के लिए रौरव, महारौरव, कुंभीपाक जैसे अत्यंत भीषण नरक हैं जहाँ यातना की तीव्रता असाधारण है।
वैतरणी में अधिक कष्ट — 'इस महादुःखदायी दक्षिण मार्ग में वैतरणी नदी है' — महापापी इस नदी को बिना किसी सहारे के पार करते हैं और असहनीय पीड़ा भोगते हैं।
यमदूत का कठोर व्यवहार — महापापियों के साथ यमदूत अत्यंत कठोर व्यवहार करते हैं। गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में — 'यम के आज्ञाकारी प्रचण्ड और चण्डक आदि दूत एक पाश से उन्हें बाँधकर नरक की ओर ले जाते हैं।'
शाल्मली वृक्ष — 'जो झूठी गवाही देने वाले, छल से धन का अर्जन करने वाले, चोरी द्वारा आजीविका चलाने वाले हैं — वे वैतरणी तटस्थित शाल्मी-वृक्ष में जाते हैं' जहाँ अतिरिक्त यातना होती है।




