विस्तृत उत्तर
पाताल और नरक में मूलभूत और अत्यंत महत्वपूर्ण अंतर है। पाताल लोक (अतल, वितल, सुतल आदि सातों अधोलोक) भूमिगत स्वर्ग हैं जहाँ दैत्यों, दानवों, यक्षों और नागों का विलासितापूर्ण जीवन होता है। यहाँ ऐश्वर्य, भोग-विलास और भौतिक सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं होती और यहाँ के निवासियों का जीवन देवराज इंद्र के स्वर्गलोक से भी अधिक सुखमय बताया गया है। इसके विपरीत नरक लोक वह स्थान है जहाँ पापी जीवात्माएं अपने दुष्कर्मों का दंड भोगने जाती हैं और वहाँ अत्यंत पीड़ा व यातनाएं होती हैं। नरक लोकों की स्थिति इन पातालों से भी नीचे तथा गर्भोदक सागर के ठीक ऊपर बताई गई है। इस प्रकार पाताल भोग का स्थान है जबकि नरक दंड का स्थान है।
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