विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में नरक में जीव को क्या मिलता है — इसका अत्यंत विस्तृत वर्णन है।
पाप के अनुसार दंड — गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है — 'किस आत्मा को क्या सजा मिलनी है, यह उसके कर्म निश्चित करते हैं।' प्रत्येक पाप के लिए एक विशिष्ट दंड निर्धारित है।
शारीरिक यातनाएँ — नरक में जीव को लोहे के जलते तीरों से बींधा जाता है, जलती हुई धातु के पात्रों में डाला जाता है, कुत्तों-गीधों-काँव-काँव करते कौओं द्वारा नोचा जाता है, अग्निकुंड में फेंका जाता है और बड़े-बड़े काँटों में फंसाया जाता है।
मानसिक यातना — पापों का बार-बार स्मरण और पश्चाताप भी नरक की एक भयंकर यातना है।
भूख-प्यास — नरक में जीव को भोजन नहीं मिलता। 'नरकों में दुःख-बहुलास्तत्र' — नरक में दुख की अधिकता है।
यमदूतों की उपस्थिति — यमदूत निरंतर जीव की देखरेख करते हैं, उसे जागृत रखते हैं और दंड देते हैं।
कोई मृत्यु नहीं — नरक में जीव को मृत्यु नहीं आती। बेहोश होने पर पुनः जागृत किया जाता है ताकि पूरा दंड भोगा जाए।





