विस्तृत उत्तर
पिण्डज शरीर के माध्यम से आत्मा यममार्ग के शुभ-अशुभ फलों और यातनाओं को अनुभव करती है। मृत्यु के बाद पहले दस दिनों में पिण्डदान से यह शरीर बनता है। दस दिनों में यह पिण्डज शरीर लगभग एक हाथ के आकार का निर्मित होता है। इसी नवीन निर्मित देह के माध्यम से आत्मा यममार्ग की यात्रा करती है और मार्ग में मिलने वाले सुख, दुख, कष्ट और कर्मानुसार फल का अनुभव करती है। यदि जीव पापी है, तो यममार्ग और नरक के कष्टों को सहने के लिए इसी पिण्डज शरीर को यातना देह में परिवर्तित किया जाता है।
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