ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

जीवन एवं मृत्यु प्रश्नोत्तर (पेज 9) — 427 प्रश्न

जीवन एवं मृत्यु से जुड़े 427 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 427 प्रश्न

मृत्यु के समय व्यक्ति की आवाज क्यों बंद हो जाती है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय वाणी सबसे पहले जाती है क्योंकि यह प्राण का बाह्यतम प्रकाशन है। व्यक्ति बोलना चाहता है परंतु बोल नहीं पाता। सुनने की शक्ति अधिक देर रहती है — इसीलिए मरणासन्न के कान में भगवान का नाम सुनाने का विधान है।

मृत्युवाणीआवाज
पूरा उत्तर पढ़ें →

मृत्यु के समय व्यक्ति की आंखों में क्या परिवर्तन होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मोहग्रस्त व्यक्ति की आँखें मृत्यु पर खुली रहती हैं, पापी की आँखें उलट जाती हैं। पुण्यात्मा की मृत्यु शांत होती है। आँखों की स्थिति व्यक्ति के कर्मों का परिचायक है।

मृत्युआँखेंप्राण निर्गमन
पूरा उत्तर पढ़ें →

क्या मृत्यु के समय व्यक्ति को डर लगता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार पापकर्मी को मृत्यु में अत्यधिक भय होता है — यमदूत देखकर वह काँप उठता है। पुण्यात्मा और ज्ञानी को भय नहीं होता। मृत्यु का भय अज्ञान और पापकर्म का परिणाम है।

मृत्यु के समय शरीर की शक्ति क्यों कम हो जाती है?

मृत्यु के समय जीवात्मा शरीर से अपना संबंध धीरे-धीरे तोड़ती है। प्राण-ऊर्जा एक-एक अंग से हटती जाती है जिससे शरीर शिथिल होता है। जीवात्मा के बिना पाँच तत्वों का यह शरीर स्वाभाविक रूप से निर्जीव हो जाता है।

मृत्युशक्तिइंद्रियाँ
पूरा उत्तर पढ़ें →

मृत्यु के समय सांस की क्या स्थिति होती है?

मृत्यु के समय श्वास धीरे-धीरे अनियमित और कमजोर होती जाती है। पाँचों प्राण एक-एक कर शिथिल होते हैं। पुण्यात्मा में उदान वायु ऊपर की ओर उठती है जिससे मृत्यु शांत होती है। पापी में यह प्रक्रिया कष्टकारी होती है।

मृत्युसांसप्राण
पूरा उत्तर पढ़ें →

मृत्यु के समय व्यक्ति को कैसी पीड़ा होती है?

गरुड़ पुराण के अनुसार प्राण-निर्गमन की पीड़ा सौ बिच्छुओं के डंक जैसी हो सकती है। परंतु पुण्यात्मा को कम पीड़ा होती है। पापी को अत्यंत कष्टकारी मृत्यु होती है। जीवन भर का ईश्वर-स्मरण मृत्यु को सहज बनाता है।

मृत्युपीड़ाकष्ट
पूरा उत्तर पढ़ें →

क्या मृत्यु के समय व्यक्ति को अपने कर्म याद आते हैं?

हाँ, गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय जीवन के अच्छे-बुरे सभी कर्म स्वतः याद आते हैं। पुण्यकर्मी को शांति मिलती है, पापी को पछतावा और भय होता है। यही कर्म अगले जन्म की दिशा तय करते हैं।

मृत्युकर्मस्मृति
पूरा उत्तर पढ़ें →

मृत्यु के समय व्यक्ति को क्या याद आता है?

मृत्यु के समय जीवन के कर्म स्वतः याद आते हैं। मोही को परिवार और इच्छाएँ, भक्त को ईश्वर का स्मरण होता है। अंतिम विचार ही अगला जन्म तय करता है — इसीलिए जीवन भर ईश्वर-स्मरण जरूरी है।

मृत्युस्मृतिअंतिम विचार
पूरा उत्तर पढ़ें →

मृत्यु के समय परिवार का क्या प्रभाव होता है?

परिवार से मोह मृत्यु को कष्टकारी बनाता है — ऐसी आत्मा प्राण छोड़ने में कठिनाई अनुभव करती है। परिजनों का शांत भाव, ईश्वर-स्मरण और गीता-पाठ मरणासन्न व्यक्ति की चेतना को शांत रखता है।

मृत्युपरिवारमोह
पूरा उत्तर पढ़ें →

मृत्यु के समय व्यक्ति की चेतना कैसी होती है?

मृत्यु के समय व्यक्ति को दिव्य दृष्टि मिलती है और वह अपना पूरा जीवन देख सकता है। चेतना की अवस्था कर्मों पर निर्भर करती है — पुण्यात्मा को शांति, पापी को भय। अंतिम विचार अगला जन्म तय करता है।

चेतनामृत्युदिव्य दृष्टि
पूरा उत्तर पढ़ें →

क्या मृत्यु के समय व्यक्ति बोल सकता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के समय सबसे पहले बोलने की शक्ति चली जाती है। व्यक्ति सुन और अनुभव कर सकता है, परंतु बोल नहीं पाता। इसीलिए मरणासन्न व्यक्ति को भगवान का नाम सुनाने का विधान है।

मृत्युवाणीबोलना
पूरा उत्तर पढ़ें →

मृत्यु के समय शरीर में क्या परिवर्तन होते हैं?

मृत्यु के समय पहले बोलने की शक्ति जाती है, फिर इंद्रियाँ शिथिल होती हैं। दिव्य दृष्टि मिलती है। पुण्यात्माओं को सहज मृत्यु, पापियों को कष्टकारी। आत्मा नौ द्वारों में से किसी एक से निकलती है।

मृत्युशारीरिक परिवर्तनइंद्रिय
पूरा उत्तर पढ़ें →

सूक्ष्म शरीर का उपयोग क्यों किया जाता है?

सूक्ष्म शरीर कर्मों के संस्कार एक जन्म से दूसरे जन्म तक ले जाता है, कर्मफल भोगने में सहायक है और नए स्थूल शरीर में प्रवेश करके उसे चेतन बनाता है। यह आत्मा का यात्रा-वाहन है।

सूक्ष्म शरीरउपयोगकर्मफल
पूरा उत्तर पढ़ें →

कर्मों का फल किस शरीर से भोगा जाता है?

स्वर्ग-नरक में कर्मों का फल सूक्ष्म शरीर से भोगा जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार पिंडदान से निर्मित यह प्रेत शरीर यमलोक की यात्रा करता है और कर्मानुसार सुख-दुःख भोगता है।

कर्मफलसूक्ष्म शरीरस्वर्ग नरक
पूरा उत्तर पढ़ें →

स्वर्ग और नरक की प्राप्ति किस आधार पर होती है?

स्वर्ग और नरक की प्राप्ति जीवनकाल के कर्मों के आधार पर होती है — पुण्य से स्वर्ग, पाप से नरक। दोनों अस्थायी हैं। कर्मभोग के बाद पुनर्जन्म होता है। केवल मोक्ष स्थायी अवस्था है।

स्वर्गनरककर्म
पूरा उत्तर पढ़ें →

क्या जीवात्मा पुनर्जन्म लेती है?

हाँ, जीवात्मा पुनर्जन्म लेती है। भगवद्गीता, गरुड़ पुराण और कठोपनिषद सभी इसकी पुष्टि करते हैं। कर्मों और अंतिम विचारों के आधार पर अगला जन्म निर्धारित होता है। मोक्ष प्राप्ति पर यह चक्र समाप्त होता है।

पुनर्जन्मजीवात्माकर्म
पूरा उत्तर पढ़ें →

मृत्यु के बाद जीवात्मा कहाँ जाती है?

मृत्यु के बाद जीवात्मा यमलोक जाती है जहाँ उसके कर्मों का न्याय होता है। पुण्यात्मा स्वर्ग, पापात्मा नरक और मोक्ष के योग्य सीधे परमधाम जाती है। 13 दिन तक आत्मा परिजनों के पास रहती है।

मृत्यु के बादजीवात्मायमलोक
पूरा उत्तर पढ़ें →

मनुष्य के कर्मों का फल कब मिलता है?

कर्मफल इसी जन्म में, मृत्यु के बाद यमलोक में या अगले जन्म में मिलता है। कोई कर्म बिना फल के नहीं रहता। संचित, प्रारब्ध और क्रियमाण — इन तीन रूपों में कर्म फल देते हैं।

कर्मकर्मफलइस जन्म
पूरा उत्तर पढ़ें →

पशु-पक्षियों की मृत्यु के बाद क्या होता है?

पशु-पक्षी भोग योनि में होते हैं। मृत्यु के बाद उनकी जीवात्मा अपने संचित कर्मों के अनुसार अगली योनि धारण करती है और क्रमशः उच्च योनियों की ओर बढ़ती है जब तक मनुष्य जन्म न मिले।

पशु पक्षीमृत्युयोनि
पूरा उत्तर पढ़ें →

केवल मनुष्य को ही कर्मफल क्यों भोगना पड़ता है?

मनुष्य 'कर्म योनि' में है — उसे विवेक और स्वतंत्र इच्छा से नए कर्म करने की शक्ति मिली है। इसीलिए वह अपने कर्मों का पूरा उत्तरदायी है और उसे उनका फल भोगना पड़ता है।

कर्मफलमनुष्य योनिविवेक
पूरा उत्तर पढ़ें →

क्या सभी प्राणी यमलोक जाते हैं?

यमलोक का विधान मुख्यतः मनुष्यों के लिए है क्योंकि केवल मनुष्य के पास विवेक से कर्म करने की शक्ति है। पशु-पक्षी भोग योनि में होते हैं और उनके कर्मों का वैसा न्याय नहीं होता जैसा मनुष्य का होता है।

यमलोकप्राणीमृत्यु
पूरा उत्तर पढ़ें →

क्या मृत्यु के समय जीवात्मा दिखाई देती है?

जीवात्मा स्वभावतः सूक्ष्म और अदृश्य है, साधारण नेत्रों से दिखाई नहीं देती। गरुड़ पुराण में बताए गए शारीरिक परिवर्तन — जैसे आँखें उलटना या शरीर शिथिल होना — उसके निर्गमन के बाह्य संकेत हैं।

जीवात्मामृत्युदृश्य
पूरा उत्तर पढ़ें →

सूक्ष्म शरीर का आकार कितना बताया गया है?

गरुड़ पुराण और कठोपनिषद में बताया गया है कि मृत्यु के समय शरीर से अंगूठे के बराबर (अंगुष्ठ मात्र) जीवात्मा निकलती है। यह प्रतीकात्मक वर्णन उस सूक्ष्म चेतना का संकेत है जो शरीर त्यागती है।

सूक्ष्म शरीरआकारअंगुष्ठ मात्र
पूरा उत्तर पढ़ें →

सूक्ष्म शरीर क्या होता है?

सूक्ष्म शरीर वह अदृश्य आवरण है जो मन, बुद्धि, अहंकार, इंद्रियों और प्राणों से बना होता है। यही एक जन्म से दूसरे जन्म में जाता है और इसमें सभी कर्मसंस्कार संचित रहते हैं।

सूक्ष्म शरीरआत्मावेदांत
पूरा उत्तर पढ़ें →

जीवात्मा शरीर छोड़ने के बाद क्या धारण करती है?

जीवात्मा स्थूल शरीर छोड़ने के बाद सूक्ष्म शरीर धारण करती है। यह सूक्ष्म शरीर मन, बुद्धि, अहंकार और इंद्रियों के सूक्ष्म तत्वों से बना होता है और अगले जन्म तक आत्मा के साथ रहता है।

जीवात्मासूक्ष्म शरीरमृत्यु के बाद
पूरा उत्तर पढ़ें →

मृत्यु को अवश्यंभावी क्यों कहा गया है?

भगवद्गीता के अनुसार 'जातस्य हि ध्रुवो मृत्युः' — जो जन्मा है उसकी मृत्यु निश्चित है। शरीर पाँच नश्वर तत्वों से बना है और वापस उन्हीं में विलीन होता है। यह प्रकृति का अटल नियम है, दंड नहीं।

मृत्युअवश्यंभावीनश्वरता
पूरा उत्तर पढ़ें →

जीवन और मृत्यु का सनातन सिद्धांत क्या है?

सनातन सिद्धांत के अनुसार जन्म और मृत्यु एक अखंड चक्र है। आत्मा अजर-अमर है, केवल शरीर बदलता है। कर्मों के अनुसार अगली योनि मिलती है और यह चक्र मोक्ष प्राप्ति तक चलता रहता है।

सनातन सिद्धांतजीवन मृत्युपुनर्जन्म
पूरा उत्तर पढ़ें →

जीवन एवं मृत्यु — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर जीवन एवं मृत्यु श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

जीवन एवं मृत्यु को गहराई से समझने का तरीका

जीवन एवं मृत्यु के पेज 9 प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

427 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।