विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में चोरी के विभिन्न रूपों और उनके नरक-दंडों का वर्णन है।
पयू नरक — 'पयू नरक में चोरी करने वालों को मल में गिराया जाता है।' साधारण चोरी के लिए यह नरक है।
तमिश्रम नरक — 'धोखे से किसी की संपत्ति हड़पने वाले लोगों की आत्माओं को तमिश्रम नरक भेजा जाता है। यहाँ आत्मा की बार-बार पिटाई की जाती है।'
शाल्मी-वृक्ष — 'छल से धन का अर्जन करने वाले, चोरी द्वारा आजीविका चलाने वाले — ये वैतरणी तटस्थित शाल्मी-वृक्ष में जाते हैं।'
स्वर्ण-चोरी महापाप — स्वर्णस्तेय पंच महापापों में से एक है। 'स्वर्ण की चोरी करने वाला' — इसे महापापी की श्रेणी में रखा गया है जिसे घोर नरक मिलता है।
पुनर्जन्म में — 'दूसरों की मेहनत की कमाई को छल-कपट से छीनने वाले जीवन में कभी स्थायी सुख प्राप्त नहीं कर पाते।' अगले जन्म में भी दरिद्रता।





