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व्रत विधि📜 शिव पुराण, व्रतराज, लोक परम्परा1 मिनट पठन

हरतालिका तीज व्रत में बालू से शिव पार्वती बनाने का क्या विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

बालू शिव-पार्वती: पार्वती ने बालू शिवलिंग बनाकर तप किया (अनुसरण)। विधि: बालू/मिट्टी→शिवलिंग+पार्वती+गणेश→केले पत्ते→षोडशोपचार→बेलपत्र। 'हरतालिका'=सखी ने हरा (छिपाया)। निर्जला+जागरण। प्रातः विसर्जन।

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विस्तृत उत्तर

हरतालिका तीज (भाद्रपद शुक्ल तृतीया) = कठोर निर्जला व्रत:

बालू से शिव-पार्वती विधान

  1. 1पौराणिक आधार: पार्वती ने हिमालय में बालू (रेत) का शिवलिंग बनाकर कठोर तप किया → शिव प्रसन्न → पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकारा। स्त्रियाँ पार्वती अनुसरण = बालू से शिव-पार्वती बनाकर पूजा।
  1. 1विधि: शुद्ध बालू (रेत)/काली मिट्टी से शिवलिंग + पार्वती + गणेश बनाएँ। केले के पत्ते पर रखें। षोडशोपचार पूजन — बेलपत्र, फूल, फल, धूप, दीप।
  1. 1'हरतालिका' अर्थ: 'हरित' = अपहरण + 'आलिका' = सखी। पार्वती की सखी ने उन्हें हर लिया (अपहरण) — पिता शिव के अलावा अन्य से विवाह कराना चाहते थे, सखी ने पार्वती को छिपाकर शिव तप कराया।
  1. 1निर्जला: यह व्रत = करवा चौथ से भी कठोर। जल भी वर्जित। रात्रि जागरण। अगले दिन पारण।
  1. 1विसर्जन: पूजा/जागरण बाद प्रातः बालू प्रतिमा = नदी/जलाशय विसर्जन।

विशेष: मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार = हरतालिका तीज अत्यंत भव्य।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, व्रतराज, लोक परम्परा
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