विस्तृत उत्तर
हरतालिका तीज (भाद्रपद शुक्ल तृतीया) = कठोर निर्जला व्रत:
बालू से शिव-पार्वती विधान
- 1पौराणिक आधार: पार्वती ने हिमालय में बालू (रेत) का शिवलिंग बनाकर कठोर तप किया → शिव प्रसन्न → पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकारा। स्त्रियाँ पार्वती अनुसरण = बालू से शिव-पार्वती बनाकर पूजा।
- 1विधि: शुद्ध बालू (रेत)/काली मिट्टी से शिवलिंग + पार्वती + गणेश बनाएँ। केले के पत्ते पर रखें। षोडशोपचार पूजन — बेलपत्र, फूल, फल, धूप, दीप।
- 1'हरतालिका' अर्थ: 'हरित' = अपहरण + 'आलिका' = सखी। पार्वती की सखी ने उन्हें हर लिया (अपहरण) — पिता शिव के अलावा अन्य से विवाह कराना चाहते थे, सखी ने पार्वती को छिपाकर शिव तप कराया।
- 1निर्जला: यह व्रत = करवा चौथ से भी कठोर। जल भी वर्जित। रात्रि जागरण। अगले दिन पारण।
- 1विसर्जन: पूजा/जागरण बाद प्रातः बालू प्रतिमा = नदी/जलाशय विसर्जन।
विशेष: मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार = हरतालिका तीज अत्यंत भव्य।





