विस्तृत उत्तर
शुक्रवार लक्ष्मी जी का विशेष दिन है — इस दिन की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है:
शुक्रवार व्रत के प्रकार
- 1वैभवलक्ष्मी व्रत: 11 शुक्रवार या 21 शुक्रवार लगातार
- 2सामान्य शुक्रवार पूजा: प्रत्येक शुक्रवार को नित्य पूजा
- 3संकट मोचन: 7 शुक्रवार किसी विशेष मनोकामना के लिए
शुक्रवार पूजा की विधि
प्रातःकाल
- 1ब्रह्ममुहूर्त में उठें
- 2स्नान करके पीत (पीले) या श्वेत वस्त्र धारण करें
- 3पूजा स्थान पर लक्ष्मी जी का चित्र/प्रतिमा स्थापित करें
पूजा विधि
- 1दीप: घी का दीप जलाएं
- 2आह्वान: 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः'
- 3स्नान: दूध या पंचामृत से
- 4वस्त्र: लाल चुनरी अर्पित करें
- 5श्रृंगार: सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, महावर अर्पण
- 6पुष्प: श्वेत और गुलाबी कमल, गुलाब, बेला, चमेली
- 7सुगंध: केवड़ा या गुलाब जल
- 8भोग: गुड़, चावल, सफेद मिठाई, खीर
- 9श्री सूक्त पाठ: 16 ऋचाओं का पाठ
- 10मंत्र जप: 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' — 108 बार
व्रत के नियम
- ▸व्रत वाले दिन एक समय भोजन करें
- ▸नमक रहित या फलाहार भोजन
- ▸सात्विक आहार — लहसुन-प्याज वर्जित
- ▸झूठ, क्रोध और कलह से बचें
- ▸किसी जरूरतमंद को अन्न या वस्त्र दान करें
वैभवलक्ष्मी व्रत
स्कंद पुराण में वर्णित 'वैभवलक्ष्मी व्रत' विशेषकर महिलाएं करती हैं:
- ▸11 या 21 शुक्रवार
- ▸वैभवलक्ष्मी व्रत कथा अवश्य सुनें
- ▸अंतिम शुक्रवार को उद्यापन करें
- ▸सुहागिनों को साड़ी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ी दें
प्रसाद: गुड़-चावल का प्रसाद सर्वश्रेष्ठ। 11 सुहागिनों को भोजन कराने का विशेष महत्व है।





