विस्तृत उत्तर
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाती है। यह भगवान विष्णु के अनंत (शेषनाग/अनंत) स्वरूप की पूजा का पर्व है।
अनंत चतुर्दशी व्रत विधि
1. संकल्प: प्रातःकाल स्नान करके भगवान अनंत (विष्णु) की पूजा का संकल्प लें। यह व्रत 14 वर्ष तक करने का विधान है।
2. अनंत सूत्र (धागा): रेशम या सूत के 14 गाँठों वाला धागा तैयार करें। इसे हल्दी से रंगें। यही 'अनंत सूत्र' है।
1अनंत पूजन
- ▸जल से भरे कलश पर कुश का आसन बनाकर शेषनाग/अनंत भगवान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- ▸षोडशोपचार पूजन — चन्दन, तुलसी, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
- ▸'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जप।
4. अनंत सूत्र बंधन: 14 गाँठ वाला पीला धागा पुरुष दाहिने हाथ में और स्त्री बाएँ हाथ में बाँधें।
5. अनंत चतुर्दशी कथा: महाभारत में युधिष्ठिर को कृष्ण ने यह व्रत बताया। इस कथा का श्रवण अनिवार्य।
6. 14 की संख्या: चतुर्दशी = 14वीं तिथि। 14 गाँठ, 14 वर्ष, 14 भुवन — सभी में 14 का महत्व।
7. गणेश विसर्जन: अनंत चतुर्दशी पर ही गणेश चतुर्थी से स्थापित गणेश प्रतिमा का विसर्जन होता है — 'गणपति बप्पा मोरया!'।
विशेष: यह व्रत 14 वर्ष तक लगातार करने से अनंत सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। 14वें वर्ष में उद्यापन (समापन) करें।





