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व्रत विधि📜 भविष्य पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण2 मिनट पठन

अनंत चतुर्दशी व्रत की विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

अनंत चतुर्दशी: भाद्रपद शुक्ल 14। विधि: 14 गाँठ पीला धागा (अनंत सूत्र) → शेषनाग/अनंत विष्णु पूजन → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कथा श्रवण → सूत्र बंधन (पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ)। 14 वर्ष व्रत। गणेश विसर्जन दिवस।

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विस्तृत उत्तर

अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाती है। यह भगवान विष्णु के अनंत (शेषनाग/अनंत) स्वरूप की पूजा का पर्व है।

अनंत चतुर्दशी व्रत विधि

1. संकल्प: प्रातःकाल स्नान करके भगवान अनंत (विष्णु) की पूजा का संकल्प लें। यह व्रत 14 वर्ष तक करने का विधान है।

2. अनंत सूत्र (धागा): रेशम या सूत के 14 गाँठों वाला धागा तैयार करें। इसे हल्दी से रंगें। यही 'अनंत सूत्र' है।

1अनंत पूजन

  • जल से भरे कलश पर कुश का आसन बनाकर शेषनाग/अनंत भगवान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • षोडशोपचार पूजन — चन्दन, तुलसी, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
  • 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जप।

4. अनंत सूत्र बंधन: 14 गाँठ वाला पीला धागा पुरुष दाहिने हाथ में और स्त्री बाएँ हाथ में बाँधें।

5. अनंत चतुर्दशी कथा: महाभारत में युधिष्ठिर को कृष्ण ने यह व्रत बताया। इस कथा का श्रवण अनिवार्य।

6. 14 की संख्या: चतुर्दशी = 14वीं तिथि। 14 गाँठ, 14 वर्ष, 14 भुवन — सभी में 14 का महत्व।

7. गणेश विसर्जन: अनंत चतुर्दशी पर ही गणेश चतुर्थी से स्थापित गणेश प्रतिमा का विसर्जन होता है — 'गणपति बप्पा मोरया!'।

विशेष: यह व्रत 14 वर्ष तक लगातार करने से अनंत सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। 14वें वर्ष में उद्यापन (समापन) करें।

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शास्त्रीय स्रोत
भविष्य पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण
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