विस्तृत उत्तर
विजया एकादशी फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसका नाम 'विजया' इसलिए है क्योंकि यह विजय (जीत) प्रदान करती है।
पौराणिक महत्व: श्रीराम ने लंका पर आक्रमण से पूर्व इसी एकादशी का व्रत रखा था और रावण पर विजय प्राप्त की। इसलिए इसे 'विजया एकादशी' कहते हैं। किसी भी कठिन कार्य, परीक्षा, न्यायालय विवाद, प्रतिस्पर्धा से पूर्व यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
विजया एकादशी व्रत विधि
1. दशमी (पूर्व दिन): संध्या को एक बार सात्त्विक भोजन। चावल-अन्न वर्जित। रात्रि में ब्रह्मचर्य।
1एकादशी दिन
- ▸ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, संकल्प: 'विजया एकादशी व्रतं करिष्ये।'
- ▸भगवान विष्णु की प्रतिमा/चित्र पर पीले वस्त्र, तुलसी, चन्दन, पीले पुष्प।
- ▸'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र 108 बार या अधिक जप।
- ▸विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता पाठ।
- ▸निर्जला या फलाहार व्रत।
3. रात्रि जागरण: विष्णु भजन, कीर्तन, कथा श्रवण।
4. द्वादशी पारण: सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि में तुलसी जल से पारण। ब्राह्मण भोज, दान।
विशेष उपाय: कोर्ट केस, प्रतियोगी परीक्षा, व्यापार प्रतिस्पर्धा, या किसी भी संघर्ष में विजय हेतु विजया एकादशी का व्रत अत्यंत प्रभावी माना गया है।





