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व्रत विधि📜 देवी भागवत पुराण, धर्म सिंधु — नवरात्रि व्रत विधान2 मिनट पठन

नवरात्रि में व्रत कैसे रखें?

संक्षिप्त उत्तर

नवरात्रि व्रत में: सेंधा नमक, कुट्टू-सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, फल, दूध-दही। प्याज-लहसुन-मांसाहार वर्जित। प्रतिदिन नवदुर्गा पूजा और सप्तशती पाठ। नवमी को कन्या पूजन के बाद व्रत पारण। 9 दिन संभव न हो तो प्रथम और नवमी का व्रत पर्याप्त है।

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विस्तृत उत्तर

नवरात्रि व्रत की विधि देवी भागवत पुराण और धर्म सिंधु में वर्णित है:

नवरात्रि कब

  • शरद नवरात्रि: अश्विन मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी (सितंबर-अक्टूबर)
  • वसंत नवरात्रि: चैत्र मास शुक्ल पक्ष (मार्च-अप्रैल)
  • दो गुप्त नवरात्रि: माघ और आषाढ़ में (तांत्रिक साधना के लिए)

व्रत के तीन स्तर

  1. 1सम्पूर्ण उपवास — 9 दिन केवल फल और जल
  2. 2एकभोजन — दिन में एक बार
  3. 3नक्त व्रत — केवल रात में भोजन

भोजन नियम

व्रत में खाएं

  • फल — सेब, केला, संतरा
  • साबूदाना खिचड़ी / खीर
  • कुट्टू आटे की रोटी / पूरी
  • सिंघाड़े के आटे का पराठा
  • समा के चावल (वरी)
  • आलू, शकरकंद
  • दूध, दही
  • मखाना
  • सेंधा नमक (सामान्य नमक नहीं)

व्रत में न खाएं

  • गेहूँ, चावल (सामान्य)
  • प्याज, लहसुन
  • मांसाहार
  • मद्य
  • सामान्य नमक

व्रत की दैनिक विधि

प्रातःकाल

  1. 1ब्रह्ममुहूर्त में स्नान
  2. 2लाल वस्त्र
  3. 3कलश पूजन
  4. 4संबंधित नवदुर्गा की पूजा
  5. 5सप्तशती पाठ
  6. 6आरती

व्रत पारण

नवमी को कन्या पूजन के बाद व्रत पारण करें।

व्रत न रख पाएं तो

देवी भागवत में कहा गया है — यदि 9 दिन व्रत संभव न हो तो प्रथम और नवमी (दो दिन) का व्रत भी पूर्ण फल देता है।

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शास्त्रीय स्रोत
देवी भागवत पुराण, धर्म सिंधु — नवरात्रि व्रत विधान
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