विस्तृत उत्तर
नवरात्रि व्रत की विधि देवी भागवत पुराण और धर्म सिंधु में वर्णित है:
नवरात्रि कब
- ▸शरद नवरात्रि: अश्विन मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी (सितंबर-अक्टूबर)
- ▸वसंत नवरात्रि: चैत्र मास शुक्ल पक्ष (मार्च-अप्रैल)
- ▸दो गुप्त नवरात्रि: माघ और आषाढ़ में (तांत्रिक साधना के लिए)
व्रत के तीन स्तर
- 1सम्पूर्ण उपवास — 9 दिन केवल फल और जल
- 2एकभोजन — दिन में एक बार
- 3नक्त व्रत — केवल रात में भोजन
भोजन नियम
व्रत में खाएं
- ▸फल — सेब, केला, संतरा
- ▸साबूदाना खिचड़ी / खीर
- ▸कुट्टू आटे की रोटी / पूरी
- ▸सिंघाड़े के आटे का पराठा
- ▸समा के चावल (वरी)
- ▸आलू, शकरकंद
- ▸दूध, दही
- ▸मखाना
- ▸सेंधा नमक (सामान्य नमक नहीं)
व्रत में न खाएं
- ▸गेहूँ, चावल (सामान्य)
- ▸प्याज, लहसुन
- ▸मांसाहार
- ▸मद्य
- ▸सामान्य नमक
व्रत की दैनिक विधि
प्रातःकाल
- 1ब्रह्ममुहूर्त में स्नान
- 2लाल वस्त्र
- 3कलश पूजन
- 4संबंधित नवदुर्गा की पूजा
- 5सप्तशती पाठ
- 6आरती
व्रत पारण
नवमी को कन्या पूजन के बाद व्रत पारण करें।
व्रत न रख पाएं तो
देवी भागवत में कहा गया है — यदि 9 दिन व्रत संभव न हो तो प्रथम और नवमी (दो दिन) का व्रत भी पूर्ण फल देता है।





