व्रत विधिबरगद पेड़ की पूजा — वट सावित्री व्रत में?वट सावित्री=ज्येष्ठ अमावस्या(पति दीर्घायु)। बरगद पर जल+दूध+रोली→मौली बांधें→7 परिक्रमा→कथा सुनें→व्रत। सावित्री ने यमराज से पति प्राण वापस लिए। बरगद=अमरत्व।#वट सावित्री#बरगद#व्रत
लोकस्वर्ग में भोजन और वस्त्र कैसे मिलते हैं?स्वर्ग में कल्पवृक्ष से इच्छानुसार भोजन मिलता है, दिव्य झीलों में दूध-शहद-रस है और कुमुद पर्वत के बरगद से वस्त्र और आभूषण भी प्राप्त होते हैं।#स्वर्ग#भोजन#वस्त्र
मंदिर ज्ञानमंदिर के प्रांगण में पीपल या बरगद का पेड़ क्यों होता है?पीपल: गीता ('अश्वत्थः'), त्रिदेव, 24×7 O₂, शनि शांति, बोधि। बरगद: दक्षिणामूर्ति (शिव), सावित्री, अमरत्व, छाया/विश्राम। दोनों: O₂↑, शांत, grounding।#पीपल#बरगद#मंदिर
व्रत पूजाबरगद के पेड़ की पूजा वट सावित्री व्रत में कैसे करेंवट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या (उत्तर भारत) या ज्येष्ठ पूर्णिमा (महाराष्ट्र/दक्षिण) को मनाया जाता है। स्नान-श्रृंगार के बाद बरगद की जड़ में जल, रोली, अक्षत, पुष्प चढ़ाएँ। कच्चा सूत 7 बार तने पर लपेटते हुए 7 परिक्रमा करें। सावित्री-सत्यवान कथा सुनें। वट में त्रिदेवों का वास — स्कन्द/भविष्योत्तर पुराण।#वट सावित्री#बरगद#सौभाग्य