व्रत विधिबरगद पेड़ की पूजा — वट सावित्री व्रत में?वट सावित्री=ज्येष्ठ अमावस्या(पति दीर्घायु)। बरगद पर जल+दूध+रोली→मौली बांधें→7 परिक्रमा→कथा सुनें→व्रत। सावित्री ने यमराज से पति प्राण वापस लिए। बरगद=अमरत्व।#वट सावित्री#बरगद#व्रत
महिला एवं धर्मवट सावित्री व्रत विधि कथाज्येष्ठ; महाभारत कथा: सावित्री ने यमराज से पति प्राण वापस। वट पूजा+7 परिक्रमा+कलावा+कथा। वट=शाश्वत=पति दीर्घायु। बुद्धि+साहस+पतिव्रत।#वट सावित्री#व्रत#विधि
महिला एवं धर्मवट सावित्री व्रत की कथा और विधिसावित्री-सत्यवान (महाभारत)। यमराज से प्राण वापस। वट पूजा, 7 परिक्रमा, कलावा, कथा। सबसे प्राचीन।#वट सावित्री#कथा#विधि
व्रत पूजाबरगद के पेड़ की पूजा वट सावित्री व्रत में कैसे करेंवट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या (उत्तर भारत) या ज्येष्ठ पूर्णिमा (महाराष्ट्र/दक्षिण) को मनाया जाता है। स्नान-श्रृंगार के बाद बरगद की जड़ में जल, रोली, अक्षत, पुष्प चढ़ाएँ। कच्चा सूत 7 बार तने पर लपेटते हुए 7 परिक्रमा करें। सावित्री-सत्यवान कथा सुनें। वट में त्रिदेवों का वास — स्कन्द/भविष्योत्तर पुराण।#वट सावित्री#बरगद#सौभाग्य