चातुर्मास: विष्णु निद्रा (दैवी कृपा अनुपलब्ध), वर्षा ऋतु (यात्रा कठिन), तप-साधना काल, जीव रक्षा (अहिंसा)। वर्जित: विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश। अनुमत: पूजा, व्रत, दान। देवउठनी = मुक्ति → विवाह आरम्भ।
- 1विष्णु निद्रा: भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। देवता सोये हुए = शुभ कार्यों में दैवी आशीर्वाद अनुपलब्ध।
- 2वर्षा ऋतु: चातुर्मास = वर्षा काल। यात्रा कठिन, बाढ़/रोग का खतरा। विवाह = बारात/यात्रा = वर्षा में अव्यावहारिक। गृह प्रवेश = नमी/सीलन।
- 3तप-साधना काल: चातुर्मास = तप, व्रत, अध्ययन, साधना हेतु। संन्यासी = एक स्थान पर रुकते हैं। गृहस्थ = सात्त्विक जीवन, आध्यात्मिक उन्नति।
- 4कीट-जीव रक्षा: वर्षा = कीट-पतंगे, जीव-जन्तु प्रचुर। यात्रा/निर्माण = जीव हिंसा। अहिंसा = चातुर्मास धर्म।