विस्तृत उत्तर
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा के साथ तिजोरी (गल्ला/लॉकर) की पूजा करने का विशेष शास्त्रीय और व्यावहारिक आधार है।
कारण
1. कुबेर = धन रक्षक: लक्ष्मी धन की देवी (धन प्रदान करने वाली) हैं, कुबेर धन के रक्षक (खजांची) हैं। तिजोरी = कुबेर का स्थान। लक्ष्मी + कुबेर = धन अर्जन + धन रक्षण = सम्पूर्ण आर्थिक समृद्धि।
2. चंचला लक्ष्मी को स्थिर करना: लक्ष्मी 'चंचला' (अस्थिर) कहलाती हैं — धन आता है, जाता भी है। तिजोरी की पूजा = लक्ष्मी को स्थिर रखने की कामना = धन टिकाऊ हो।
3. पंचपूजन का अंग: दीपावली पूजा में पाँच पूजन होते हैं — गणेश (विघ्न नाश), लक्ष्मी (धन), काली (लेखनी/दवात पर), सरस्वती (बहीखाते पर), कुबेर (तिजोरी पर)। तिजोरी पूजा = कुबेर पूजा।
4. व्यापारिक परम्परा: व्यापारी वर्ग के लिए तिजोरी/गल्ला उनकी जीवनरेखा है। नये वर्ष (विक्रम संवत) का आरम्भ दीपावली से होता है — इसलिए तिजोरी, बहीखाते, व्यापारिक उपकरणों की पूजा कर नये वर्ष का शुभारम्भ।
पूजा विधि: तिजोरी/गल्ले को साफ करें → स्वस्तिक बनाएँ → लक्ष्मी-कुबेर प्रतिमा/चित्र रखें → रोली-अक्षत-पुष्प → 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय...' मंत्र → धूप-दीपक → नारियल-मिठाई भोग। तिजोरी में चाँदी का सिक्का, सुपारी रखें।
कुबेर मंत्र: 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।'





