विस्तृत उत्तर
संस्कृत साहित्य के अनुसार 'काहल' या 'कहल' शब्द का मूल अर्थ एक विशाल नगाड़े, रणभेरी या युद्ध के समय बजाए जाने वाले वाद्य यंत्र (War-drum) से होता है। प्राचीन काल में चक्रवर्ती सम्राट या सेनापति के आगमन पर इसका वादन होता था। ज्योतिष में इसका अर्थ है कि जिस जातक की कुंडली में यह योग होता है, उसके यश, प्रभाव और पराक्रम की गूंज समाज में नगाड़े की गगनभेदी ध्वनि की तरह दूर-दूर तक सुनाई देती है।





