विस्तृत उत्तर
ज्ञान और कला से जुड़े हर साधन को आज के दिन देवी सरस्वती का साक्षात् विग्रह माना जाता है।
प्रक्रिया: वेदी के समीप पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर एक पीला वस्त्र बिछाकर उस पर विद्यार्थियों की पुस्तकें, डायरी, कलम तथा संगीतकारों के वाद्य यंत्र (वीणा, हारमोनियम, बाँसुरी आदि) रखे जाते हैं।
इन ग्रंथों पर लाल चंदन या रोली से 'स्वास्तिक' (Swastika) का पवित्र चिह्न अंकित किया जाता है। कलम (Pen) पर रक्षा-सूत्र (मौली) बांधा जाता है।
इसके पश्चात् इन उपकरणों को भी अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित कर उनकी आरती की जाती है। यह इस बात का दार्शनिक प्रमाण है कि भौतिक उपकरण केवल जड़ वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि वे उस परम चेतना (सरस्वती) की अभिव्यक्ति का माध्यम हैं।
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