ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
मंदिर ज्ञान📜 वैदिक परंपरा, मंदिर वास्तु1 मिनट पठन

मंदिर के द्वार पर स्वस्तिक का चिन्ह क्यों बनाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

'शुभ करने वाला'। 4 दिशा, 4 वेद, 4 पुरुषार्थ, गणेश प्रतीक। रक्षा (नकारात्मक प्रवेश नहीं)। ऊर्जा attract। लाल (कुमकुम) = शक्ति। हर शुभ कार्य।

📖

विस्तृत उत्तर

स्वस्तिक = सर्वशुभ चिन्ह:

अर्थ: 'सु' + 'अस्ति' + 'क' = 'शुभ + है + करने वाला' = 'शुभ करने वाला'।

क्यों

  1. 1मंगल: स्वस्तिक = सर्वप्रथम मंगल चिन्ह — हर शुभ कार्य।
  2. 24 दिशा: 4 भुजा = 4 दिशा = सर्वदिशा शुभ।
  3. 34 वेद: 4 = ऋग्/यजुर्/साम/अथर्व = ज्ञान।
  4. 44 पुरुषार्थ: धर्म/अर्थ/काम/मोक्ष।
  5. 5गणेश: स्वस्तिक = गणेश प्रतीक (कुछ परंपरा)।
  6. 6रक्षा: नकारात्मक शक्ति प्रवेश नहीं — द्वार पर = घर/मंदिर सुरक्षित।
  7. 7ऊर्जा: स्वस्तिक = ऊर्जा केंद्र — सकारात्मक ऊर्जा attract।

रंग: लाल (कुमकुम/सिंदूर) = शक्ति। हल्दी = शुभ।

📜
शास्त्रीय स्रोत
वैदिक परंपरा, मंदिर वास्तु
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

स्वस्तिकचिन्हद्वारक्योंशुभ

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

मंदिर के द्वार पर स्वस्तिक का चिन्ह क्यों बनाते हैं — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको मंदिर ज्ञान से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर वैदिक परंपरा, मंदिर वास्तु पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।