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द्वार — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 4 प्रश्न

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मंदिर ज्ञान

मंदिर में तोरण बांधने का क्या अर्थ होता है?

स्वागत (देवता+भक्त), शुभता (आम=सदाबहार), रक्षा (नकारात्मकता नहीं), ऊर्जा (ऑक्सीजन), उत्सव। 'तोरणं मंगलं विद्यात्'। आम पत्ता सर्वप्रचलित।

तोरणबांधनाअर्थ
आत्मा और मोक्ष

आत्मा शरीर के किस हिस्से से निकलती है मृत्यु समय

आत्मा ब्रह्मरंध्र (सिर) से निकले → मोक्ष/उत्तम गति (गीता 8.12-13)। नेत्र → देवलोक, नासिका → अंतरिक्ष, मुख → पुनर्जन्म, गुदा → अधोगति। योगी प्राण को सुषुम्ना नाड़ी से ब्रह्मरंध्र तक ले जाते हैं। निर्गमन कर्म और साधना पर निर्भर।

आत्मानिर्गमनद्वार
मंदिर ज्ञान

मंदिर के द्वार पर द्वारपाल की मूर्ति क्यों होती है?

रक्षक (अशुभ प्रवेश नहीं), जय-विजय (विष्णु), नंदी (शिव), भक्त परीक्षा (योग्यता), ऊर्जा सील। डरावने = नकारात्मकता भय → भागे। गर्भगृह सुरक्षा।

द्वारपालमूर्तिद्वार
मंदिर ज्ञान

मंदिर के द्वार पर स्वस्तिक का चिन्ह क्यों बनाते हैं?

'शुभ करने वाला'। 4 दिशा, 4 वेद, 4 पुरुषार्थ, गणेश प्रतीक। रक्षा (नकारात्मक प्रवेश नहीं)। ऊर्जा attract। लाल (कुमकुम) = शक्ति। हर शुभ कार्य।

स्वस्तिकचिन्हद्वार

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।