विस्तृत उत्तर
वैदिक ज्योतिष में 'नल योग' 32 नाभस योगों में से एक अत्यंत विशिष्ट और दुर्लभ 'आश्रय योग' है। यह योग तब बनता है जब जन्म कुण्डली के सातों मुख्य ग्रह केवल 'द्विस्वभाव राशियों' (Dual Signs) में बैठे हों। यह योग इंसान को बहुत ज्यादा लचीला, चतुर, बहुमुखी प्रतिभा का धनी और परिस्थितियों के अनुसार ढल जाने वाला बनाता है।





