विस्तृत उत्तर
संस्कृत भाषा के 'संकट' (जिसका तात्पर्य जीवन के दारुण कष्ट, विघ्न अथवा बाधा से है) और 'हर' (अर्थात समूल निवारण करने वाला) शब्दों के दार्शनिक व शाब्दिक मेल से 'संकष्टी' शब्द की उत्पत्ति हुई है। इसका सीधा अर्थ है— जीवन के भयंकर कष्टों और बाधाओं को जड़ से खत्म करने वाला।





