विस्तृत उत्तर
बजरंग बाण गोस्वामी तुलसीदास जी की रचना है और यह हनुमान जी का अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है:
बजरंग बाण का परिचय
- ▸रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास
- ▸भाषा: अवधी
- ▸'बजरंग' = वज्र + अंग (वज्र जैसे अंगों वाले = हनुमान जी)
- ▸'बाण' = तीर — यह स्तोत्र तीर की तरह तत्काल प्रभावी है
बजरंग बाण कब पढ़ें
अनिवार्य परिस्थितियाँ
- 1भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव — यह सर्वोत्तम समय है; बजरंग बाण इन शक्तियों का तत्काल नाश करता है
- 2अत्यंत कठिन संकट — जब हर तरफ से रास्ता बंद लगे
- 3शत्रु भय — शत्रु के अत्याचार से रक्षा
- 4तंत्र-मंत्र का प्रभाव — यदि किसी ने काला जादू या नजर लगाई हो
- 5गंभीर रोग — स्वयं या परिजन की गंभीर बीमारी में
नियमित पाठ
- ▸मंगलवार और शनिवार को
- ▸हनुमान जयंती पर
- ▸सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के बाद शुद्धि हेतु
पाठ का सही समय
- ▸ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे) — सर्वश्रेष्ठ
- ▸सूर्योदय के समय
- ▸सायंकाल (संध्या पूजन के बाद)
बजरंग बाण पाठ के नियम
- 1स्नान करके पाठ करें
- 2हनुमान जी का चित्र सामने रखें
- 3घी का दीप जलाएं
- 4पूर्ण श्रद्धा और भय-रहित मन से पढ़ें
- 5बीच में न रोकें — एक बार शुरू किया तो पूरा पढ़ें
बजरंग बाण कब न पढ़ें (विशेष)
कुछ विद्वानों का मत है कि बजरंग बाण का नित्य पाठ बिना विशेष कारण के न करें — यह अत्यंत उग्र स्तोत्र है और इसे सदैव किसी संकट या विशेष कारण से पढ़ें। हनुमान चालीसा नित्य पाठ के लिए और बजरंग बाण विशेष संकट के लिए उत्तम है।
बजरंग बाण का प्रारंभिक दोहा
> निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करैं सनमान।
> तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥





