विस्तृत उत्तर
शिव जी को भस्मासुर का वरदान देकर इसलिए उद्विग्नता हुई क्योंकि वे तुरंत समझ गए थे कि यह शक्ति विनाशकारी है। वरदान देने के बाद वृकासुर ने कृतज्ञता नहीं दिखाई, बल्कि शिव जी पर ही उसका परीक्षण करने की इच्छा जताई। वह शिव जी को भस्म करके पार्वती जी को पाने और स्वयं को सर्वशक्तिमान सिद्ध करने का विचार करने लगा। शिव जी जानते थे कि यदि वे अपने ही वरदान को नकारते हैं, तो वचन की मर्यादा टूटेगी। इसलिए वे उसे मारने के बजाय उससे बचते हुए विष्णु की शरण में गए। यह स्थिति दया के दुरुपयोग का अत्यंत मार्मिक उदाहरण है।
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