विस्तृत उत्तर
हिंदू धर्मशास्त्रों — विशेषतः स्कंद पुराण, देवी भागवत पुराण और शिव पुराण — में माँ पार्वती और दुर्गा को एक-दूसरे से अभिन्न माना गया है।
देवी भागवत पुराण के अनुसार, परब्रह्म (सृष्टिकर्ता) की मूल शक्ति आद्याशक्ति (परमेश्वरी) हैं। यही आद्याशक्ति सर्वप्रथम दक्ष प्रजापति की पुत्री 'सती' के रूप में जन्म लेती हैं, और योगाग्नि में भस्म होने के पश्चात पर्वतराज हिमालय के यहाँ 'पार्वती' (उमा, गौरी) के रूप में जन्म लेती हैं।
स्कंद पुराण स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है कि देवी पार्वती ने ही ब्रह्मांड को असुरों के आतंक से बचाने के लिए समय-समय पर विभिन्न भयंकर और योद्धा रूप धारण किए। जब दुर्गमासुर का वध करने की आवश्यकता हुई, तो देवी पार्वती ने ही 'दुर्गा' रूप लिया; जब महिषासुर का वध करना था, तो वे 'महिषासुरमर्दिनी' कहलाईं।
शाक्त परंपरा में पार्वती शांति, सामंजस्य, सौंदर्य, भक्ति और पूर्ण मातृत्व का रूप हैं। दूसरी ओर, दुर्गा उन्हीं पार्वती का एक अत्यंत उग्र, रक्षक और संहारक अवतार है।





